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श्लोक 5.36.28  |
कुलानि समुपेतानि गोभि: पुरुषतोऽर्थत:।
कुलसंख्यां न गच्छन्ति यानि हीनानि वृत्तत:॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| जो कुल गौ, जन और धन से समृद्ध है, किन्तु सदाचार से रहित है, वह उत्तम कुलों में नहीं गिना जा सकता ॥ 28॥ |
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| A family which is rich in cows, people and wealth but is devoid of good conduct cannot be counted among the good families.॥ 28॥ |
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