श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.36.28 
कुलानि समुपेतानि गोभि: पुरुषतोऽर्थत:।
कुलसंख्यां न गच्छन्ति यानि हीनानि वृत्तत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जो कुल गौ, जन और धन से समृद्ध है, किन्तु सदाचार से रहित है, वह उत्तम कुलों में नहीं गिना जा सकता ॥ 28॥
 
A family which is rich in cows, people and wealth but is devoid of good conduct cannot be counted among the good families.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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