श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.36.22 
धृतराष्ट्र उवाच
महाकुलेभ्य: स्पृहयन्ति देवा
धर्मार्थनित्याश्च बहुश्रुताश्च।
पृच्छामि त्वां विदुर प्रश्नमेतं
भवन्ति वै कानि महाकुलानि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - विदुर! धर्म और अर्थ के अनुष्ठान में तत्पर तथा सुशिक्षित उत्तम कुल में उत्पन्न पुरुषों की इच्छा देवता भी करते हैं। इसलिए मैं तुमसे यह प्रश्न पूछता हूँ कि श्रेष्ठ (उत्तम) श्रेष्ठ पुरुष कौन हैं?॥22॥
 
Dhritarashtra said - Vidur! Even the gods who are devoted to the rituals of religion and wealth and are well-read desire men born in noble families. That is why I ask you this question that who are the great (excellent) noble people?॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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