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mahabharat 5.36.21: मनुष्य दुष्टों के बल से, निरन्तर प्रयत्न से, बुद्धि से और परिश्रम से धन तो प्राप्त कर सकता है; परन्तु वह सज्जनों का मान और सदाचार कभी पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर सकता ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 5.36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 36: दत्तात्रेय और साध्यदेवताओंके संवादका उल्लेख करके महाकुलीन लोगोंका लक्षण बतलाते हुए विदुरका धृतराष्ट्रको समझाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.36.21 
प्राप्नोति वै वित्तमसद्‍बलेन
नित्योत्थानात् प्रज्ञया पौरुषेण।
न त्वेव सम्यग् लभते प्रशंसां
न वृत्तमाप्नोति महाकुलानाम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य दुष्टों के बल से, निरन्तर प्रयत्न से, बुद्धि से और परिश्रम से धन तो प्राप्त कर सकता है; परन्तु वह सज्जनों का मान और सदाचार कभी पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर सकता ॥ 21॥
 
A man may acquire wealth by the power of evil men, by continuous efforts, by wisdom and by hard work; but he can never completely attain the honour and good conduct of noble men. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)