श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.35.9 
विरोचन उवाच
प्राजापत्यास्तु वै श्रेष्ठा वयं केशिनि सत्तमा:।
अस्माकं खल्विमे लोका: के देवा: के द्विजातय:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
विरोचन बोले, "केशिनी! हम प्रजापति की श्रेष्ठ संतान हैं, अतः हम ही श्रेष्ठ हैं। यह सम्पूर्ण जगत हमारा है। हमारे सामने देवता क्या हैं? और ब्राह्मण क्या हैं?"
 
Virochana said, "Keshini! We are the best children of Prajapati, hence we are the best. This whole world belongs to us. What are gods in front of us? And what are Brahmins?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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