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mahabharat 5.35.77: भरतश्रेष्ठ! पाण्डव समस्त उत्तम गुणों से सम्पन्न हैं और आपके प्रति पिता के समान आचरण करते हैं; आप भी उनके साथ पुत्रवत व्यवहार करके उनके साथ उचित व्यवहार करें।   |   mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  5.35.77 
सर्वैर्गुणैरुपेतास्तु पाण्डवा भरतर्षभ।
पितृवत् त्वयि वर्तन्ते तेषु वर्तस्व पुत्रवत्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! पाण्डव समस्त उत्तम गुणों से सम्पन्न हैं और आपके प्रति पिता के समान आचरण करते हैं; आप भी उनके साथ पुत्रवत व्यवहार करके उनके साथ उचित व्यवहार करें।
 
Bharatshrestha! Pandavas are blessed with all the best qualities and behave like a father towards you; You too should treat them appropriately by treating them filially.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि प्रजागरपर्वणि विदुरनीतिवाक्ये पञ्चत्रिंशोऽध्याय:॥ ३५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत प्रजागरपर्वमें विदुर-नीतिवाक्यविषयक पैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)