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श्लोक  5.35.7 
विरोचनोऽथ दैतेयस्तदा तत्राजगाम ह।
प्राप्तुमिच्छंस्ततस्तत्र दैत्येन्द्रं प्राह केशिनी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस समय दैत्यराज विरोचन उसे प्राप्त करने की इच्छा से वहाँ आया। तब केशिनी ने दैत्यराज से इस प्रकार कहा।
 
At that time the son of the demon Virochana came there with the desire to obtain her. Then Keshini spoke to the king of demons in this manner. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)