श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.35.7 
विरोचनोऽथ दैतेयस्तदा तत्राजगाम ह।
प्राप्तुमिच्छंस्ततस्तत्र दैत्येन्द्रं प्राह केशिनी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस समय दैत्यराज विरोचन उसे प्राप्त करने की इच्छा से वहाँ आया। तब केशिनी ने दैत्यराज से इस प्रकार कहा।
 
At that time the son of the demon Virochana came there with the desire to obtain her. Then Keshini spoke to the king of demons in this manner. 7.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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