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mahabharat 5.35.66: जो बुद्धिमान पुरुषों से ज्ञान प्राप्त करता है, वही विद्वान् है; क्योंकि बुद्धिमान् पुरुष ही धर्म और धन को प्राप्त करके अनायास ही उन्नति करने में समर्थ होता है ॥66॥   |   mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  5.35.66 
प्रज्ञामेवागमयति य: प्राज्ञेभ्य: स पण्डित:।
प्राज्ञो ह्यवाप्य धर्मार्थौ शक्नोति सुखमेधितुम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
जो बुद्धिमान पुरुषों से ज्ञान प्राप्त करता है, वही विद्वान् है; क्योंकि बुद्धिमान् पुरुष ही धर्म और धन को प्राप्त करके अनायास ही उन्नति करने में समर्थ होता है ॥66॥
 
He who receives wisdom from wise men is a learned man; Because only an intelligent man is able to progress effortlessly by attaining religion and wealth. 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)