श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  5.35.58 
न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धा
न ते वृद्धा ये न वदन्ति धर्मम्।
नासौ धर्मो यत्र न सत्यमस्ति
न तत् सत्यं यच्छलेनाभ्युपेतम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
जो सभा बड़ों से रहित है, वह सभा नहीं है; जो धर्म की बातें नहीं करते, वे बड़ों से रहित हैं; जिसमें सत्य नहीं है, वह धर्म नहीं है और जो छल से भरा है, वह सत्य नहीं है ॥58॥
 
An assembly without elders is not an assembly; those who do not speak of righteousness are not elders; that which does not have truth is not righteousness and that which is full of deceit is not true. ॥ 58॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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