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श्लोक 5.35.57  |
तत्र पूर्वचतुर्वर्गो दम्भार्थमपि सेव्यते।
उत्तरश्च चतुर्वर्गो नामहात्मसु तिष्ठति॥ ५७॥ |
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| अनुवाद |
| इनमें से प्रथम चार का प्रयोग तो कोई भी व्यक्ति (यहाँ तक कि अभिमानी व्यक्ति भी) अभिमान के लिए कर सकता है, किन्तु अंतिम चार उनमें नहीं रह सकते जो महात्मा नहीं हैं। 57. |
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| Of these, the first four can be used by anyone (even a proud person) for the sake of pride, but the last four cannot remain in those who are not great souls. 57. |
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