Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.35.45: अग्निहोत्र का आदरपूर्वक पालन, मौन का आदरपूर्वक पालन, स्वाध्याय का आदरपूर्वक अध्ययन और यज्ञ का आदरपूर्वक अनुष्ठान - ये चार कर्म भय को दूर करने वाले हैं; किन्तु यदि इन्हें ठीक प्रकार से न किया जाए, तो ये भय उत्पन्न करते हैं ॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निहोत्र का आदरपूर्वक पालन, मौन का आदरपूर्वक पालन, स्वाध्याय का आदरपूर्वक अध्ययन और यज्ञ का आदरपूर्वक अनुष्ठान - ये चार कर्म भय को दूर करने वाले हैं; किन्तु यदि इन्हें ठीक प्रकार से न किया जाए, तो ये भय उत्पन्न करते हैं ॥ 45॥
Respectful performance of Agnihotra, respectful observance of silence, respectful study of the self and respectful performance of Yajnas - these four acts are capable of removing fear; but if they are not performed properly, they cause fear. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥