| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश » श्लोक 44 |
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| | | | श्लोक 5.35.44  | सामुद्रिकं वणिजं चोरपूर्वं
शलाकधूर्तं च चिकित्सकं च।
अरिं च मित्रं च कुशीलवं च
नैतान् साक्ष्ये त्वधिकुर्वीत सप्त॥ ४४॥ | | | | | | अनुवाद | | हस्तरेखाविद्, चोरी करनेवाला, जुआरी, वैद्य, शत्रु, मित्र और नर्तक- इन सातों को कभी साक्षी नहीं बनाना चाहिए ॥ 44॥ | | | | A palmist, a person who steals, a gambler, a doctor, an enemy, a friend and a dancer - these seven should never be made witnesses. ॥ 44॥ | | ✨ ai-generated | | |
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