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श्लोक 5.35.41  |
यथा यथा हि पुरुष: कल्याणे कुरुते मन:।
तथा तथास्य सर्वार्था: सिद्धॺन्ते नात्र संशय:॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे ही मनुष्य कल्याण पर ध्यान देता है, उसकी समस्त इच्छाएँ पूरी हो जाती हैं - इसमें कोई संदेह नहीं है ॥ 41॥ |
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| As a man focuses on welfare, all his desires are fulfilled - there is no doubt about this. ॥ 41॥ |
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