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mahabharat 5.35.41: जैसे ही मनुष्य कल्याण पर ध्यान देता है, उसकी समस्त इच्छाएँ पूरी हो जाती हैं - इसमें कोई संदेह नहीं है ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.35.41 
यथा यथा हि पुरुष: कल्याणे कुरुते मन:।
तथा तथास्य सर्वार्था: सिद्धॺन्ते नात्र संशय:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही मनुष्य कल्याण पर ध्यान देता है, उसकी समस्त इच्छाएँ पूरी हो जाती हैं - इसमें कोई संदेह नहीं है ॥ 41॥
 
As a man focuses on welfare, all his desires are fulfilled - there is no doubt about this. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)