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श्लोक 5.35.40  |
न देवा दण्डमादाय रक्षन्ति पशुपालवत्।
यं तु रक्षितुमिच्छन्ति बुद्धॺा संविभजन्ति तम्॥ ४०॥ |
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| अनुवाद |
| देवता लोग चरवाहों की तरह लाठी लेकर किसी की रक्षा नहीं करते। वे जिसकी रक्षा करना चाहते हैं, उसे सद्बुद्धि प्रदान करते हैं ॥40॥ |
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| The gods do not guard anyone with a stick like shepherds. They give the one they want to protect good wisdom. ॥ 40॥ |
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