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श्लोक 5.35.38  |
एष प्रह्राद पुत्रस्ते मया दत्तो विरोचन:।
पादप्रक्षालनं कुर्यात् कुमार्या: संनिधौ मम॥ ३८॥ |
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| अनुवाद |
| प्रह्लाद, मैंने तुम्हारा पुत्र विरोचन तुम्हें लौटा दिया है, किन्तु अब उसे कुमारी केशिनी के पास जाकर मेरे चरण धोने चाहिए। |
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| Prahlada, I have given your son Virochana back to you, but now he should go to Kumari Keshini and wash my feet. |
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