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mahabharat 5.35.36: विरोचन! अब सुधन्वा तुम्हारे जीवन का स्वामी है। सुधन्वा! अब यदि तुम इसे मुझे दे दो, तो मैं विरोचन को प्राप्त करना चाहता हूँ। 36।   |   mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.35.36 
विरोचन सुधन्वायं प्राणानामीश्वरस्तव।
सुधन्वन् पुनरिच्छामि त्वया दत्तं विरोचनम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
विरोचन! अब सुधन्वा तुम्हारे जीवन का स्वामी है। सुधन्वा! अब यदि तुम इसे मुझे दे दो, तो मैं विरोचन को प्राप्त करना चाहता हूँ। 36।
 
Virochana! Now Sudhanva is the master of your life. Sudhanvan! Now if you give it to me, I want to get Virochana. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)