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mahabharat 5.35.32: झूठा फैसला देने वाला राजा नगर में कैद हो जाता है और बाहरी द्वार पर बहुत से शत्रुओं को भूख से तड़पते हुए देखता है। 32.   |   mahabharat अध्याय 5.35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.35.32 
नगरे प्रतिरुद्ध: सन् बहिर्द्वारे बुभुक्षित:।
अमित्रान् भूयस: पश्येद् य: साक्ष्यमनृतं वदेत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
झूठा फैसला देने वाला राजा नगर में कैद हो जाता है और बाहरी द्वार पर बहुत से शत्रुओं को भूख से तड़पते हुए देखता है। 32.
 
The king who gives a false judgment is imprisoned in the city and sees many enemies suffering from hunger at the outer gate. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)