श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.35.31 
सुधन्वोवाच
यां रात्रिमधिविन्ना स्त्री यां चैवाक्षपराजित:।
यां च भाराभितप्ताङ्गो दुर्विवक्ता स्म तां वसेत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
सुधन्वा बोले - सहधर्मिणी स्त्री, जुए में हारे हुए जुआरी और रात में भारी बोझ ढोने से थके हुए शरीर वाले मनुष्य की जो दशा होती है, वही दशा मिथ्या निर्णय देने वाले वक्ता की भी होती है ॥31॥
 
Sudhanva said - The condition of a woman with a co-wife, a gambler who has lost in gambling and a person whose body is tired from carrying heavy loads at night is also the same condition of a speaker who gives wrong judgment. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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