श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.35.30 
प्रह्राद उवाच
अथ यो नैव प्रब्रूयात् सत्यं वा यदि वानृतम्।
एतत् सुधन्वन् पृच्छामि दुर्विवक्ता स्म किं वसेत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद बोले, "हे सुधन्वान्! मैं आपसे यह प्रश्न पूछ रहा हूँ कि जो दुष्ट वक्ता सत्य नहीं बोलता या मिथ्या निर्णय देता है, उसकी क्या दशा होती है?"
 
Prahlada said, "O Sudhanvan, I am asking you this question, what is the condition of a wicked speaker who does not speak the truth or gives a false decision?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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