श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.35.3 
आर्जवं प्रतिपद्यस्व पुत्रेषु सततं विभो।
इह कीर्तिं परां प्राप्य प्रेत्य स्वर्गमवाप्स्यसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
विभो! तुम अपने दोनों पुत्रों कौरवों और पाण्डवों के साथ मृदुता (समानता) से व्यवहार करो। ऐसा करने से तुम इस लोक में महान् सफलता प्राप्त करके मृत्यु के पश्चात स्वर्ग को जाओगे। 3॥
 
Vibho! You should treat both your sons, Kauravas and Pandavas, with gentleness (equally). By doing this, after achieving great success in this world, you will go to heaven after death. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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