श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.35.27 
सुधन्वोवाच
उदकं मधुपर्कं च पथिष्वेवार्पितं मम।
प्रह्राद त्वं तु मे तथ्यं प्रश्नं प्रब्रूहि पृच्छत:।
किं ब्राह्मणा: स्विच्छ्रेयांस उताहो स्विद् विरोचन:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सुधन्वा ने कहा- प्रह्लाद! मुझे मार्ग में जल और मधुपर्क मिला है। तुम मेरे इस प्रश्न का सही उत्तर दो कि कौन श्रेष्ठ है, ब्राह्मण या विरोचन?॥27॥
 
Sudhanva said— Prahlad! I have found water and madhupark on the way. You give me the correct answer to the question I am asking—who is superior, Brahmin or Virochana?॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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