श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.35.24 
किं वै सहैवं चरथो न पुरा चरथ: सह।
विरोचनैतत् पृच्छामि किं ते सख्यं सुधन्वना॥ २४॥
 
 
अनुवाद
[तब उन्होंने सार्वजनिक रूप में विरोचन से कहा-] विरोचन! मैं तुमसे पूछता हूँ, क्या तुम सुधन्वा के साथ मित्र हो गए हो? फिर तुम दोनों एक साथ कैसे आ रहे हो? पहले तुम दोनों कभी साथ-साथ नहीं चलते थे॥ 24॥
 
[Then he said to Virochana in public form -] Virochana! I ask you, have you become friends with Sudhanva? Then how come you are coming together? Earlier you both never used to walk together.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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