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श्लोक 5.35.24  |
किं वै सहैवं चरथो न पुरा चरथ: सह।
विरोचनैतत् पृच्छामि किं ते सख्यं सुधन्वना॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| [तब उन्होंने सार्वजनिक रूप में विरोचन से कहा-] विरोचन! मैं तुमसे पूछता हूँ, क्या तुम सुधन्वा के साथ मित्र हो गए हो? फिर तुम दोनों एक साथ कैसे आ रहे हो? पहले तुम दोनों कभी साथ-साथ नहीं चलते थे॥ 24॥ |
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| [Then he said to Virochana in public form -] Virochana! I ask you, have you become friends with Sudhanva? Then how come you are coming together? Earlier you both never used to walk together.॥ 24॥ |
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