श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.35.20 
विरोचन उवाच
आवां कुत्र गमिष्याव: प्राणयोर्विपणे कृते।
न तु देवेष्वहं स्थाता न मनुष्येषु कर्हिचित्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
विरोचन बोले- भला, हम दोनों अपनी जान जोखिम में डालकर कहां जाएंगे? मैं न तो देवताओं के पास जा सकता हूं और न ही मनुष्यों से कभी निर्णय करवा सकता हूं।
 
Virochana said - Well, where will we both go after risking our lives? I can neither go to the gods nor can I ever get a decision made from humans.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas