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श्लोक 5.35.20  |
विरोचन उवाच
आवां कुत्र गमिष्याव: प्राणयोर्विपणे कृते।
न तु देवेष्वहं स्थाता न मनुष्येषु कर्हिचित्॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| विरोचन बोले- भला, हम दोनों अपनी जान जोखिम में डालकर कहां जाएंगे? मैं न तो देवताओं के पास जा सकता हूं और न ही मनुष्यों से कभी निर्णय करवा सकता हूं। |
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| Virochana said - Well, where will we both go after risking our lives? I can neither go to the gods nor can I ever get a decision made from humans. |
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