श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.35.16 
सुधन्वोवाच
पितापुत्रौ सहासीतां द्वौ विप्रौ क्षत्रियावपि।
वृद्धौ वैश्यौ च शूद्रौ च न त्वन्यावितरेतरम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सुधन्वा ने कहा, "विरोचन! एक आसन पर पिता और पुत्र एक साथ बैठ सकते हैं; दो ब्राह्मण, दो क्षत्रिय, दो वृद्ध, दो वैश्य और दो शूद्र भी एक साथ बैठ सकते हैं; परन्तु अन्य कोई दो व्यक्ति एक साथ नहीं बैठ सकते।"
 
Sudhanva said, "Virochan! A father and son can sit together on one seat; two Brahmins, two Kshatriyas, two old men, two Vaishyas and two Shudras can also sit together; but no other two persons can sit together."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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