श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 35: विदुरके द्वारा केशिनीके लिये सुधन्वाके साथ विरोचनके विवादका वर्णन करते हुए धृतराष्ट्रको धर्मोपदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.35.13 
सुधन्वा च समागच्छत् प्राह्रादिं केशिनीं तथा।
समागतं द्विजं दृष्ट्वा केशिनी भरतर्षभ।
प्रत्युत्थायासनं तस्मै पाद्यमर्घ्यं ददौ पुन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! सुधन्वा प्रह्लादकुमार विरोचन और केशिनी के पास आये। ब्राह्मण को आता देख केशिनी खड़ी हो गई और उसे आसन, पाद्य और अर्घ्य दिया। 13॥
 
Bharatshrestha! Sudhanva Prahladkumar came to Virochana and Keshini. Seeing the Brahmin coming, Keshini stood up and offered him seat, padya and arghya. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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