Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.33.d3: युधिष्ठिर में क्रूरता का अभाव है, करुणा, सदाचार, सत्य और वीरता है; उनका मन विनम्र है। इन्हीं गुणों के कारण वे अनेक कष्टों को सोच-समझकर चुपचाप सहन कर रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  5.33.d3 
आनृशंस्यादनुक्रोशाद् धर्मात् सत्यात् पराक्रमात्।
गुरुत्वात् त्वयि सम्प्रेक्ष्य बहून् क्लेशांस्तितिक्षते॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर में क्रूरता का अभाव है, करुणा, सदाचार, सत्य और वीरता है; उनका मन विनम्र है। इन्हीं गुणों के कारण वे अनेक कष्टों को सोच-समझकर चुपचाप सहन कर रहे हैं।
 
Yudhishthira lacks cruelty, has compassion, virtue, truth and valour; he has a respectable mind. Due to these virtues, he is bearing many hardships silently after thinking.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)