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mahabharat 5.33.62: हे भारतश्रेष्ठ! वेदवेत्ता जानते हैं कि मनुष्य के कार्यों की सिद्धि के लिए तीन प्रकार के उपाय सुने जाते हैं - उत्तम, मध्यम और अधम ॥62॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.33.62 
त्रयो न्याया मनुष्याणां श्रूयन्ते भरतर्षभ।
कनीयान् मध्यम: श्रेष्ठ इति वेदविदो विदु:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! वेदवेत्ता जानते हैं कि मनुष्य के कार्यों की सिद्धि के लिए तीन प्रकार के उपाय सुने जाते हैं - उत्तम, मध्यम और अधम ॥62॥
 
Bharatshrestha! Veda experts know that three types of solutions are heard - good, medium and bad - for the accomplishment of human tasks. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)