Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.114: जो व्यक्ति देश के रीति-रिवाजों, अवसरों और जातियों के धर्मों को विस्तार से जानने का प्रयास करता है, वह श्रेष्ठ और निकृष्ट में भेद करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है। वह जहाँ भी जाता है, वहाँ एक बड़े समूह पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लेता है ॥114॥ | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान्
बुभूषते य: स परावरज्ञ:।
स यत्र तत्राभिगत: सदैव
महाजनस्याधिपत्यं करोति॥ ११४॥
अनुवाद
जो व्यक्ति देश के रीति-रिवाजों, अवसरों और जातियों के धर्मों को विस्तार से जानने का प्रयास करता है, वह श्रेष्ठ और निकृष्ट में भेद करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है। वह जहाँ भी जाता है, वहाँ एक बड़े समूह पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लेता है ॥114॥
A person who tries to know the customs of the country, the occasions and the religions of the castes in detail, gets the ability to differentiate between the best and the worst. Wherever he goes, he always establishes his supremacy over a large crowd. ॥ 114॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥