Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.107: जो महान् और बुद्धिमान् पुरुष विपत्ति से कभी दुःखी नहीं होता, अपितु जो सावधानी के साथ परिश्रम का आश्रय लेता है और उचित समय पर कष्ट सहता है, उसके शत्रु अवश्य ही पराजित हो जाते हैं ॥107॥ | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्राप्यापदं न व्यथते कदाचि-
दुद्योगमन्विच्छति चाप्रमत्त:।
दु:खं च काले सहते महात्मा
धुरन्धरस्तस्य जिता: सपत्ना:॥ १०७॥
अनुवाद
जो महान् और बुद्धिमान् पुरुष विपत्ति से कभी दुःखी नहीं होता, अपितु जो सावधानी के साथ परिश्रम का आश्रय लेता है और उचित समय पर कष्ट सहता है, उसके शत्रु अवश्य ही पराजित हो जाते हैं ॥107॥
The great and intelligent person who is never saddened by a calamity, but who resorts to diligence with caution and endures suffering at the right time, his enemies are surely defeated. ॥107॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥