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mahabharat 5.33.104: जो राजा काम और क्रोध का त्याग करता है, सुपात्रों को धन देता है, विद्वान है, शास्त्रों को जानता है और अपने कर्तव्य को शीघ्रता से पूरा करता है, उसके (उनके आचरण और वचन) सब लोग प्रमाण मानकर स्वीकार करते हैं ॥104॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  5.33.104 
य: काममन्यू प्रजहाति राजा
पात्रे प्रतिष्ठापयते धनं च।
विशेषविच्छ्रुतवान् क्षिप्रकारी
तं सर्वलोक: कुरुते प्रमाणम्॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
जो राजा काम और क्रोध का त्याग करता है, सुपात्रों को धन देता है, विद्वान है, शास्त्रों को जानता है और अपने कर्तव्य को शीघ्रता से पूरा करता है, उसके (उनके आचरण और वचन) सब लोग प्रमाण मानकर स्वीकार करते हैं ॥104॥
 
A king who renounces lust and anger, gives wealth to the deserving, is an expert, knows the scriptures and is quick to complete his duties, his (their behaviour and words) are accepted by everyone as evidence. ॥104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)