श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना  »  श्लोक d2-d6
 
 
श्लोक  5.32.d2-d6 
अर्जुन उवाच
पितामहं शान्तनवं धृतराष्ट्रं च संजय।
द्रोणं सपुत्रं शल्यं च महाराजं च बाह्लिकम्॥
विकर्णं सोमदत्तं च शकुनिं चापि सौबलम्।
विविंशतिं चित्रसेनं जयत्सेनं च संजय॥
भगदत्तं तथा चैव शूरं रणकृतां वरम्॥
ये चाप्यन्ये कुरवस्तत्र सन्ति
राजानश्चेद् भूमिपाला: समेता:।
युयुत्सव: पार्थिवा: सैन्धवाश्च
समानीता धार्तराष्ट्रेण सूत॥
यथान्यायं कुशलं वन्दनं च
समागमे मद्वचनेन वाच्या:।
ततो ब्रूया: संजय राजमध्ये
दुर्योधनं पापकृतां प्रधानम्॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने कहा- संजय! शान्तनुनंदन पितामह भीष्म, धृतराष्ट्र, पुत्रों सहित द्रोणाचार्य, महाराज शल्य, बाह्लीक, विकर्ण, सोमदत्त, सुबलपुत्र शकुनि, विविंशति, चित्रसेन, जयत्सेन तथा योद्धाओं में श्रेष्ठ भगदत्त - ये सभी तथा अन्य लोग, वहाँ रहने वाले कौरव, युद्ध की इच्छा से वहाँ एकत्र हुए राजा तथा दुर्योधन द्वारा बुलाए गए सभी भूमिपाल और सिन्धु के वीर, उन सभी से उचित रीति से मिलो और मेरी ओर से उनका कुशल-क्षेम और नमस्कार करो। तत्पश्चात् राजाओं की सभा में पापियों के नेता दुर्योधन से मेरा संदेश कहो।
 
Arjun said- Sanjay! Shantanunandan grandfather Bhishma, Dhritarashtra, Dronacharya with his sons, Maharaj Shalya, Bahlika, Vikarna, Somdutta, Subala's son Shakuni, Vivinshati, Chitrasen, Jayatsen and the best among warriors Bhagadatt - all these and others, the Kauravas who live there, the kings who have gathered there with the desire of war and all the Bhumipalas and heroes of Sindhu, whom Duryodhana has called, Meet all of them in a proper manner and wish them well and greetings from me. After that, tell my message to Duryodhana, the leader of sinners, in the gathering of kings.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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