श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.32.8 
संजय उवाच
संजयोऽहं भूमिपते नमस्ते
प्राप्तोऽस्मि गत्वा नरदेव पाण्डवान्।
अभिवाद्य त्वां पाण्डुपुत्रो मनस्वी
युधिष्ठिर: कुशलं चान्वपृच्छत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! आपको नमस्कार। हे नरदेव! मैं संजय हूँ और पांडवों के दर्शन करके लौटा हूँ। उदार हृदय पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर ने आपको नमस्कार किया है और आपका कुशलक्षेम पूछा है।"
 
Sanjaya said— O King! Greetings to you. O Lord of men! I am Sanjaya and I have returned from visiting the Pandavas. The generous-hearted son of Pandu, Yudhishthira, has saluted you and asked about your well-being.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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