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श्लोक 5.32.3  |
आचक्ष्व धृतराष्ट्राय द्वा:स्थ मां समुपागतम्।
सकाशात् पाण्डुपुत्राणां संजयं मा चिरं कृथा:॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| द्वारपाल! मेरे आगमन की सूचना राजा धृतराष्ट्र को देकर कहो, ‘पाण्डवों की ओर से संजय आ गये हैं।’ विलम्ब न करो। |
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| Gatekeeper! Inform King Dhritarashtra about my arrival and tell him, 'Sanjaya has come from the Pandavas.' Do not delay. |
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