श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.32.28 
स त्वां गर्हे भारतानां विरोधा-
दन्तो नूनं भवितायं प्रजानाम्।
नो चेदिदं तव कर्मापराधात्
कुरून् दहेत् कृष्णवर्त्मेव कक्षम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अतः मैं भरतवंश में फूट डालने के कारण तुम्हारी निन्दा करता हूँ; क्योंकि कौरवों और पाण्डवों का यह संघर्ष निश्चय ही सम्पूर्ण प्रजा के विनाश का कारण बनेगा। यदि तुम मेरी आज्ञा के अनुसार कार्य नहीं करोगे, तो तुम्हारे अपराध के कारण अर्जुन सम्पूर्ण कौरववंश को उसी प्रकार जला डालेगा, जैसे अग्नि घास-फूस के ढेर को जला देती है॥ 28॥
 
Therefore, I condemn you for spreading dissension in the Bharat dynasty; because this conflict between the Kauravas and the Pandavas will certainly lead to the destruction of the entire population. If you do not act according to my instructions, then due to your crime Arjuna will burn the entire Kaurava dynasty in the same way as fire burns a pile of grass and hay.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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