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श्लोक 5.32.2  |
सम्प्राप्य हास्तिनपुरं शीघ्रमेव प्रविश्य च।
अन्त:पुरं समास्थाय द्वा:स्थं वचनमब्रवीत्॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| हस्तिनापुर पहुँचकर वे शीघ्रतापूर्वक राजमहल में प्रविष्ट हुए और भीतरी कक्ष के पास जाकर द्वारपाल से बोले -॥2॥ |
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| On reaching Hastinapur he quickly entered the royal palace and going near the inner chamber he said to the gatekeeper -॥ 2॥ |
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