| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना » श्लोक 18 |
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| | | | श्लोक 5.32.18  | हीनप्रज्ञो दौष्कुलेयो नृशंसो
दीर्घं वैरी क्षत्रविद्यास्वधीर:।
एवंधर्मानापद: संश्रयेयु-
र्हीनवीर्यो यश्च भवेदशिष्ट:॥ १८॥ | | | | | | अनुवाद | | जो बुद्धिहीन, नीच कुल में उत्पन्न, क्रूर, दीर्घजीवी, क्षत्रियतुल्य युद्धकला से अनभिज्ञ, साहसहीन और असभ्य हैं, ऐसे लोग कष्टों का सामना करते हैं ॥18॥ | | | | Those who are devoid of wisdom, born in a low caste, cruel, long-suffering, ignorant of Kshatriya-like warfare, lacking in courage and rude, such people face troubles. ॥18॥ | | ✨ ai-generated | | |
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