श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.32.11 
संजय उवाच
सहामात्य: कुशली पाण्डुपुत्रो
बुभूषते यच्च तेऽग्रेऽऽत्मनोऽभूत्।
निर्णिक्तधर्मार्थकरो मनस्वी
बहुश्रुतो दृष्टिमाञ्छीलवांश्च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - पाण्डुपुत्र राजा युधिष्ठिर अपने मन्त्रियों सहित सकुशल हैं। वे आपके समक्ष पूर्व में प्राप्त राज्य और धन को पुनः लेना चाहते हैं। वे शुद्ध भाव से धर्म और अर्थ का आचरण करने वाले हैं। वे बुद्धिमान, विद्वान, दूरदर्शी और चरित्रवान हैं।॥ 11॥
 
Sanjaya said, "King Yudhishthira, son of Pandu, is safe and sound along with his ministers. He wants to take back the kingdom and wealth he had received earlier in your presence. He is a person who practices Dharma and Artha with pure intentions. He is intelligent, learned, far-sighted and of good character.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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