तथा भीष्मं शान्तनवं भारतानां पितामहम्।
शिरसाभिवदेथास्त्वं मम नाम प्रकीर्तयन्॥ ८॥
अभिवाद्य च वक्तव्यस्ततोऽस्माकं पितामह:।
भवता शन्तनोर्वंशो निमग्न: पुनरुद्धृत:॥ ९॥
स त्वं कुरु तथा तात स्वमतेन पितामह।
यथा जीवन्ति ते पौत्रा: प्रीतिमन्त: परस्परम्॥ १०॥
अनुवाद
इसी प्रकार मेरा नाम लेते हुए सिर झुकाकर भरतवंश के पितामह शान्तनुनन्दन भीष्मजी को प्रणाम करो। प्रणाम करने के बाद हमारे पितामह से इस प्रकार कहो - 'पितामह! आपने शान्तनु के डूबते हुए वंश को पुनर्जीवित किया था। अब अपनी बुद्धि का उपयोग करके पुनः विचार करो और ऐसा कुछ करो जिससे तुम्हारे सभी पौत्र परस्पर प्रेमपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकें।'॥8-10॥
Similarly, while taking my name, bow your head and salute the grandfather of the Bharat dynasty, Shantanu Nandan Bhishmaji. After saluting, say to our grandfather like this - 'Grandfather! You had revived the sinking dynasty of Shantanu. Now think again using your intelligence and do something such that all your grandsons can live their lives with mutual love.'॥ 8-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥