Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.29.d1: इसी प्रकार क्षत्रिय को स्वाध्याय, यज्ञ और दान करना चाहिए। उसे किसी से कुछ भी नहीं मांगना चाहिए। उसे न तो दूसरों के लिए यज्ञ करना चाहिए और न ही अध्यापन का कार्य करना चाहिए; यही क्षत्रियों का प्राचीन धर्म है, जैसा कि धर्मशास्त्रों में कहा गया है। | mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(अधीयीत क्षत्रियोऽथो यजेत
दद्याद् दानं न तु याचेत किंचित्।
न याजयेन्नापि चाध्यापयीत
एष स्मृत: क्षत्रधर्म: पुराण:॥ )
अनुवाद
इसी प्रकार क्षत्रिय को स्वाध्याय, यज्ञ और दान करना चाहिए। उसे किसी से कुछ भी नहीं मांगना चाहिए। उसे न तो दूसरों के लिए यज्ञ करना चाहिए और न ही अध्यापन का कार्य करना चाहिए; यही क्षत्रियों का प्राचीन धर्म है, जैसा कि धर्मशास्त्रों में कहा गया है।
Similarly, a Kshatriya should do self-study, perform sacrifices and give donations. He should not beg for anything from anyone. He should neither perform sacrifices for others nor do the work of teaching; this is the ancient religion of Kshatriyas as stated in the religious scriptures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥