श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.29.56 
लताधर्मा धार्तराष्ट्रा: शाला: संजय पाण्डवा:।
न लता वर्धते जातु महाद्रुममनाश्रिता॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
संजय! धृतराष्ट्र के पुत्र लताओं के समान हैं और पाण्डव साल वृक्ष के समान हैं। कोई भी लता महान वृक्ष का आश्रय लिए बिना नहीं बढ़ सकती (इसी प्रकार धृतराष्ट्र के पुत्र पाण्डवों का आश्रय लेकर ही बढ़ सकते हैं)॥ 56॥
 
Sanjay! Dhritarashtra's sons are like creepers and the Pandavas are like sal trees. No creeper can grow without taking shelter of a great tree (so Dhritarashtra's sons can grow only by taking shelter of the Pandavas).॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)