वनं राजा धृतराष्ट्र: सपुत्रो
व्याघ्रास्ते वै संजय पाण्डुपुत्रा:।
सिंहाभिगुप्तं न वनं विनश्येत्
सिंहो न नश्येत वनाभिगुप्त:॥ ५४॥
अनुवाद
संजय! राजा धृतराष्ट्र अपने पुत्रों सहित वन हैं और पाण्डव उस वन में रहने वाले व्याघ्र हैं। सिंहों द्वारा रक्षित वन नष्ट नहीं होता और वन में रक्षित सिंह भी नष्ट नहीं होता। उस वन को नष्ट मत करो ॥ 54॥
Sanjay! King Dhritarashtra along with his sons are a forest and the Pandavas are tigers living in that forest. A forest protected by lions is not destroyed and a lion protected in the forest is not destroyed. Do not destroy that forest. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥