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mahabharat 5.29.48: यदि मैं पाण्डवों और कौरवों के स्वार्थों का नाश किए बिना उनमें संधि कराने में सफल हो जाऊँ, तो यह परम पवित्र और महान उन्नति का कार्य मेरे द्वारा सम्पन्न हो जाएगा और कौरव भी मृत्यु के पंजे से बच जाएँगे॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.29.48 
अहापयित्वा यदि पाण्डवार्थं
शमं कुरूणामपि चेच्छकेयम्।
पुण्यं च मे स्याच्चरितं महोदयं
मुच्येरंश्च कुरवो मृत्युपाशात्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं पाण्डवों और कौरवों के स्वार्थों का नाश किए बिना उनमें संधि कराने में सफल हो जाऊँ, तो यह परम पवित्र और महान उन्नति का कार्य मेरे द्वारा सम्पन्न हो जाएगा और कौरव भी मृत्यु के पंजे से बच जाएँगे॥ 48॥
 
If I am successful in bringing about a treaty between the Pandavas and the Kauravas without destroying their self-interests, then this most pious and great task of progress will be accomplished by me and the Kauravas too will be saved from the clutches of death.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)