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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.29.46 
गान्धारराज: शकुनिर्निकृत्या
यदब्रवीद् द्यूतकाले स पार्थम्।
पराजितो नन्दन: किं तवास्ति
कृष्णया त्वं दीव्य वै याज्ञसेन्या॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
पासों के खेल के दौरान गांधार नरेश शकुनि ने कुंतीपुत्र युधिष्ठिर से छलपूर्वक कहा था कि अब तो तुम अपने छोटे भाई को भी हार गए हो, अब तुम्हारे पास बचा ही क्या है? इसलिए अब तुम्हें द्रौपदी की पुत्री कृष्ण को ही दांव पर लगाकर जुआ खेलना चाहिए।
 
During the game of dice, Gandhara king Shakuni had treacherously told Kunti's son Yudhishthira that now you have lost even your younger brother, what do you have left? Therefore, now you should gamble by putting Draupadi's daughter Krishna at stake.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)