Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.29.44: कर्ण के मुख से निकला हुआ कठोर वचन रूपी बाण अत्यन्त पीड़ादायक और दुखदायी था। वह कर्ण के कान में से होकर, हड्डियों को छेदता हुआ अर्जुन के हृदय में जा लगा। वह तीक्ष्ण पीड़ा देने वाला वचन रूपी बाण आज भी अर्जुन के हृदय में धँसा हुआ है (और उसके हृदय को चोट पहुँचा रहा है)।॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्ण के मुख से निकला हुआ कठोर वचन रूपी बाण अत्यन्त पीड़ादायक और दुखदायी था। वह कर्ण के कान में से होकर, हड्डियों को छेदता हुआ अर्जुन के हृदय में जा लगा। वह तीक्ष्ण पीड़ा देने वाला वचन रूपी बाण आज भी अर्जुन के हृदय में धँसा हुआ है (और उसके हृदय को चोट पहुँचा रहा है)।॥ 44॥
The arrow of harsh words that came out of Karna's mouth was very painful and hurtful. It entered through the ear, pierced the bones and entered Arjuna's heart. That arrow of words that caused sharp pain is still stuck in Arjuna's heart (and is hurting his heart).॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥