श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.29.23 
अधीयीत ब्राह्मणो वै यजेत
दद्यादीयात् तीर्थमुख्यानि चैव।
अध्यापयेद् याजयेच्चापि याज्यान्
प्रतिग्रहान् वा विहितान् प्रतीच्छेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण को चाहिए कि वह अध्ययन करे, यज्ञ और दान करे, प्रमुख तीर्थस्थानों का भ्रमण करे, अपने शिष्यों को शिक्षा दे तथा अपने अतिथियों के लिए यज्ञ करे अथवा शास्त्रविधि के अनुसार दान ग्रहण करे। 23॥
 
The Brahmin should study, perform yagya and charity, visit major pilgrimage sites, teach his disciples and perform yagya for his guests or accept donations as prescribed in the scriptures. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)