जानन्निमं सर्वलोकस्य धर्मं
विप्रेन्द्राणां क्षत्रियाणां विशां च।
स कस्मात् त्वं जानतां ज्ञानवान् सन्
व्यायच्छसे संजय कौरवार्थे॥ १७॥
अनुवाद
संजय! आप श्रेष्ठ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा समस्त लोकों के इस सुविख्यात धर्म को जानते हैं। आप बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, फिर भी आप कौरवों के स्वार्थ की पूर्ति के लिए यह बातें क्यों फैला रहे हैं?
Sanjay! You know this well-known Dharma of the best Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and all the worlds. You are the best among the wise, yet why are you spreading words to fulfill the selfish motives of the Kauravas?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥