यमो राजा वैश्रवण: कुबेरो
गन्धर्वयक्षाप्सरसश्च सूत।
ब्रह्मविद्यां ब्रह्मचर्यं क्रियां च
निषेवमाणा ऋषयोऽमुत्र भान्ति॥ १६॥
अनुवाद
हे सुत! यमराज, विश्रवापुत्र कुबेर, गन्धर्व, यक्ष और अप्सराएँ भी अपने-अपने कर्मों के प्रभाव से स्वर्ग में विद्यमान हैं। ब्रह्मज्ञान और ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले महर्षि भी अपने कर्मों के बल से ही परलोक में प्रकाशित हो रहे हैं। 16॥
Yarn! Yamraj, Vishrava's son Kuber, Gandharva, Yaksha and Apsaras are also present in heaven due to the effect of their respective deeds. The Maharishi who consumes the knowledge of Brahma and the practice of celibacy is also becoming illuminated in the next world only through the power of his actions. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥