श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.29.11 
अतन्द्रिता भारमिमं महान्तं
बिभर्ति देवी पृथिवी बलेन।
अतन्द्रिता: शीघ्रमपो वहन्ति
संतर्पयन्त्य: सर्वभूतानि नद्य:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीदेवी भी आलस्य से रहित होकर (कार्य में तत्पर रहकर) संसार के इस महान भार को बलपूर्वक वहन करती हैं। ये नदियाँ भी आलस्य त्यागकर शीघ्रता से जल बहाकर समस्त प्राणियों को तृप्त करती हैं। 11॥
 
The Earth Goddess also carries this great burden of the world with force, being free from laziness (being active in work). These rivers also give up laziness and shed water quickly, satisfying all the living beings. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)