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mahabharat 5.26.5-6h: सांसारिक विषयों का चिंतन करने से शरीर को कष्ट होता है। जो व्यक्ति सांसारिक विषयों के विचारों से पूर्णतः मुक्त है, उसे कभी दुःख नहीं होता। जैसे धधकती हुई अग्नि में ईंधन डालने से उसकी शक्ति बढ़ जाती है, वैसे ही विषय-भोग और धन पाकर मनुष्य का लोभ और भी बढ़ जाता है। जैसे धधकती हुई अग्नि घी से नहीं बुझती, वैसे ही मनुष्य विषय-भोग और धन से कभी तृप्त नहीं होता। ॥5 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  5.26.5-6h 
कामाभिध्या स्वशरीरं दुनोति
यया प्रमुक्तो न करोति दु:खम्।
यथेध्यमानस्य समिद्धतेजसो
भूयो बलं वर्धते पावकस्य॥ ५॥
कामार्थलाभेन तथैव भूयो
न तृप्यते सर्पिषेवाग्निरिद्ध:।
 
 
अनुवाद
सांसारिक विषयों का चिंतन करने से शरीर को कष्ट होता है। जो व्यक्ति सांसारिक विषयों के विचारों से पूर्णतः मुक्त है, उसे कभी दुःख नहीं होता। जैसे धधकती हुई अग्नि में ईंधन डालने से उसकी शक्ति बढ़ जाती है, वैसे ही विषय-भोग और धन पाकर मनुष्य का लोभ और भी बढ़ जाता है। जैसे धधकती हुई अग्नि घी से नहीं बुझती, वैसे ही मनुष्य विषय-भोग और धन से कभी तृप्त नहीं होता। ॥5 1/2॥
 
Thinking about worldly things causes pain to the body. One who is completely free from thoughts of worldly things never experiences sorrow. Just as adding fuel to a blazing fire increases its strength, similarly, a person's greed increases even more when he gets sensual pleasures and wealth. Like a blazing fire that cannot be extinguished with ghee, a person is never satisfied with sensual pleasures and wealth. ॥ 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)