श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.26.26 
इन्द्रोऽप्येतन्नोत्सहेत् तात हर्तु-
मैश्वर्यं नो जीवति भीमसेने।
धनंजये नकुले चैव सूत
तथा वीरे सहदेवे सहिष्णौ॥ २६॥
 
 
अनुवाद
प्रिय संजय! जब तक भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहनशील वीर सहदेव जीवित हैं, तब तक इन्द्र भी हमारा धन नहीं छीन सकेगा॥ 26॥
 
Dear Sanjaya, as long as Bhimasena, Arjuna, Nakula and the tolerant brave Sahadeva are alive, even Indra will not be able to snatch away our wealth.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)