श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 25: संजयका युधिष्ठिरको धृतराष्ट्रका संदेश सुनाना एवं अपनी ओरसे भी शान्तिके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.25.6 
न युज्यते कर्म युष्मासु हीनं
सत्त्वं हि वस्तादृशं भीमसेना:।
उद्भासते ह्यञ्जनबिन्दुवत्त-
च्छुभ्रे वस्त्रे यद् भवेत् किल्बिषं व:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे महाबली पाण्डवों! तुम इतने सत्त्वगुण से युक्त हो कि तुमसे कोई भी पाप कर्म नहीं हो सकता। यदि तुममें कोई दोष होता, तो वह श्वेत वस्त्र पर काले दाग के समान चमकता (छिपता नहीं)।॥6॥
 
O Pandavas who have gathered a formidable army! You are so full of Sattva Guna that no evil deed can be committed by you. If you had any fault, it would have shone like a black stain on a white garment (cannot be hidden).॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)